Sunday, 5 April 2026

HS/10वीं मैट्रिक 2026 परिणाम घोषित – सभी स्टूडेंट्स चेक करें रिज़ल्ट

 


📢 HS/मैट्रिक (10वीं) परिणाम: बड़ी अपडेट्स

📍 आसाम बोर्ड (SEBA) ने 10 अप्रैल 2026 को HSLC (10वीं) परिणाम घोषित कर दिया है, और छात्र अपने रोल नंबर से ऑफिशियल वेबसाइट पर मार्कशीट चेक कर सकते हैं।

📍 बिहार बोर्ड (BSEB) ने भी इस बार 10वीं (मैट्रिक) परिणाम जल्द जारी करने की घोषणा की, जिसमें लाखों विद्यार्थियों का इंतज़ार समाप्त होने वाला है। शिक्षा मंत्री ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया कि लगभग 1:15 बजे रिज़ल्ट जारी किया जाएगा।

📍 राजस्थान बोर्ड (RBSE) का 10वीं नतीजा जारी होने की संभावना पिछले हफ्तों में चर्चा में रहा है, रिपोर्टों के अनुसार परिणाम मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में जारी होने की अपडेट मिलती रही है।

📍 देश के अन्य बोर्डों का भी परिणाम चक्र जारी है:

  • मेघालय बोर्ड (MBOSE) 7 अप्रैल को SSLC (10वीं) परिणाम घोषित करने जा रहा है।
  • आसाम बोर्ड के कक्षा 10वीं नतीजे 10 अप्रैल को घोषित कर दिए गए हैं।
  • भारत के अन्य राज्य बोर्ड भी अपनी-अपनी परीक्षाओं के परिणाम क्रमशः अप्रैल से मई के बीच रिलीज़ करेंगे।

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📊 विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

✔️ रिज़ल्ट चेक कैसे करें: स्टूडेंट्स अपना HS/10वीं बोर्ड रिज़ल्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर रोल नंबर के साथ देख सकते हैं।
✔️ डिजिटल विकल्प: रिज़ल्ट अब कई बोर्डों में डिज़िलॉकर और UMANG ऐप पर भी उपलब्ध हो रहा है।
✔️ क्या हुआ इंतज़ार खत्म: हजारों छात्रों के लिए रिज़ल्ट घोषित होने से आगे की पढ़ाई, स्ट्रीम चयन और करियर योजनाओं का मार्ग स्पष्ट होने लगा है।

🎓 क्या आगे की प्रक्रिया है?

हालांकि सभी बोर्डों के रिज़ल्ट एक ही तारीख़ को नहीं घोषित हुए हैं, विद्यार्थी अब जल्द ही परिणाम के अनुसार अगली क्लास/अभ्यास और प्रवेश प्रक्रियाओं के लिए तैयार होंगे।

यदि आप चाहें तो मैं अलग-अलग राज्य बोर्डों के टॉपर सूची, पास प्रतिशत, या डायरेक्ट रिज़ल्ट लिंक भी उपलब्ध करवा सकता हूँ—बताइए किस बोर्ड के बारे में आप और जानना चाहते हैं?

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असम विधानसभा चुनाव 2026: 102 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले, ADR रिपोर्ट से खुलासा



गुवाहाटी: असम में 9 अप्रैल 2026 को होने वाले एक चरण के विधानसभा चुनाव से पहले उम्मीदवारों के शपथपत्रों ने एक बार फिर राजनीति में आपराधिक मामलों के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।

Association for Democratic Reforms (ADR) और Assam Election Watch की 31 मार्च 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषण किए गए 722 उम्मीदवारों में से 102 उम्मीदवार (करीब 14%) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जबकि 82 उम्मीदवार (लगभग 11%) गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं।

किन पार्टियों के उम्मीदवारों पर सबसे ज्यादा केस?

रिपोर्ट के अनुसार प्रमुख राजनीतिक दलों में:

  • All India United Democratic Front (AIUDF) के 37% उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले
  • Indian National Congress के 28% उम्मीदवार
  • Bharatiya Janata Party के 9% उम्मीदवार

इससे साफ है कि विभिन्न दलों में उम्मीदवार चयन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। Raijor Dal के अध्यक्ष और सिबसागर के विधायक अखिल गोगोई ने अपने हलफनामे में 21 लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। इनमें साजिश, हिंसा भड़काने और मानहानि जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। हालांकि, अब तक किसी भी मामले में उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है।अखिल गोगोई की पहचान एक जमीनी कार्यकर्ता के रूप में रही है। उन्होंने किसान संगठन KMSS के जरिए भूमि अधिकार, बड़े बांधों के विरोध और RTI जैसे मुद्दों पर आंदोलन किए और बाद में राजनीति में प्रवेश किया। Badruddin Ajmal का मामला AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल, जो इस बार बिन्नाकांडी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, ने अपने हलफनामे में एक आपराधिक मामला घोषित किया है।वे एक प्रसिद्ध व्यवसायी और धार्मिक विद्वान भी हैं और 2005 में राजनीति में आए थे। उनकी पार्टी अल्पसंख्यक समुदायों के मुद्दों को उठाने के लिए जानी जाती है। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma का रिकॉर्ड | असम के मौजूदा मुख्यमंत्री और जलुकबाड़ी से भाजपा उम्मीदवार हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने 2026 के नामांकन में कोई भी लंबित आपराधिक मामला नहीं बताया है।

हालांकि, उनके खिलाफ पुराने मामलों में वे पहले ही अदालत से बरी हो चुके हैं। उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर कांग्रेस और फिर भाजपा तक पहुंचा है। Shiladitya Dev भी चर्चा मेंहोज़ाई से भाजपा उम्मीदवार शिलादित्य देव ने अपने हलफनामे में करीब 13 आपराधिक मामलों की जानकारी दी है।इनमें से अधिकांश मामले राजनीतिक विरोध प्रदर्शन और सभाओं से जुड़े बताए जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकतर मामलों का संबंध:

  • राजनीतिक प्रदर्शन
  • भाषण या विरोध
  • जन आंदोलनों

भारतीय कानून के अनुसार, केवल मामला दर्ज होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं होता, लेकिन फिर भी यह मुद्दा चुनावी बहस का अहम हिस्सा बना रहता है।9 अप्रैल 2026 को मतदान होना है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड को कितना महत्व देते हैं और विकास, स्थानीय मुद्दों तथा नेतृत्व को किस तरह प्राथमिकता देते हैं। इस रिपोर्ट में दी गई सभी जानकारी उम्मीदवारों द्वारा चुनाव आयोग को सौंपे गए शपथपत्रों और ADR की 31 मार्च 2026 की रिपोर्ट पर आधारित है।

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Friday, 27 March 2026

Dhurandhar movie, Ranveer Singh film, Aditya Dhar spy thriller, Bollywood comeback actors, Rakesh Bedi new role, Arjun Rampal Dhurandhar, Gaurav Gera acting

  धुरंधर में पुरानी पहचान का नया दम: अनुभवी कलाकारों की शानदार वापसी



मुंबई: हिंदी सिनेमा में अक्सर नए चेहरों और बड़े सितारों का बोलबाला रहता है, लेकिन इस समय सिनेमाघरों में कुछ अलग ही कहानी लिखी जा रही है। Dhurandhar फ्रेंचाइज़ी न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है, बल्कि उन कलाकारों को भी फिर से चमकने का मौका दे रही है, जो पिछले कुछ सालों से साइडलाइन हो गए थे।

 बड़े स्टार के पीछे छुपी बड़ी कहानी

जहाँ Ranveer Singh अपनी दमदार परफॉर्मेंस से सुर्खियाँ बटोर रहे हैं, वहीं निर्देशक Aditya Dhar की इस स्पाई-थ्रिलर दुनिया में एक और खास बात देखने को मिल रही है—अनुभवी कलाकारों की जोरदार वापसी।

यह फिल्म सिर्फ एक्शन और थ्रिल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच बन गई है जहाँ पुराने कलाकार खुद को नए अंदाज़ में पेश कर रहे हैं।

 अनुभवी चेहरों की नई पहचान

इस फ्रेंचाइज़ी में Rakesh Bedi, Arjun Rampal और Gaurav Gera जैसे कलाकारों को नए और मजबूत किरदारों में देखा जा रहा है।

  • राकेश बेदी, जो पहले कॉमिक रोल्स के लिए जाने जाते थे, अब एक गंभीर और प्रभावशाली भूमिका में नजर आ रहे हैं।
  • अर्जुन रामपाल ने अपने स्क्रीन प्रेजेंस से फिल्म में गहराई जोड़ दी है।
  • गौरव गेरा ने अपने अभिनय से दर्शकों को चौंका दिया है और साबित किया है कि वह सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं हैं।

“पुराना दोस्त” वाला एहसास

फिल्म देखने वाले दर्शकों के लिए यह अनुभव कुछ ऐसा है जैसे कोई पुराना दोस्त अचानक नए अंदाज़ में सामने आ जाए और पूरी महफिल लूट ले। यही वजह है कि धुरंधर सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक भावनात्मक कनेक्शन भी बन रही है।

 इंडस्ट्री के लिए नया ट्रेंड?

आज के दौर में जहाँ फिल्में अक्सर नए चेहरों या बड़े बजट पर निर्भर रहती हैं, वहीं धुरंधर यह दिखा रही है कि सही कहानी और मजबूत किरदारों के साथ अनुभवी कलाकार भी उतना ही बड़ा असर डाल सकते हैं।

यह ट्रेंड बॉलीवुड के लिए एक सकारात्मक संकेत है—जहाँ टैलेंट को उम्र या ट्रेंड से नहीं, बल्कि उसके हुनर से आंका जा रहा है।

 निष्कर्ष

धुरंधर फ्रेंचाइज़ी ने यह साबित कर दिया है कि सिनेमा सिर्फ नएपन का खेल नहीं है, बल्कि अनुभव और अभिनय की गहराई भी उतनी ही जरूरी है।
अगर यही रफ्तार जारी रही, तो आने वाले समय में और भी कई “भूले-बिसरे” चेहरे फिर से बड़े पर्दे पर अपनी चमक बिखेरते नजर आ सकते हैं।


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Thursday, 26 March 2026

Gen Z vs BJP Veteran: Guwahati Seat Becomes Battleground in Assam Elections 2026

 गुवाहाटी सीट पर जनरेशन क्लैश: युवा vs अनुभवी



Guwahati: असम के चुनावी माहौल में इस बार सेंट्रल गुवाहाटी सीट खास चर्चा में है। यहां मुकाबला सिर्फ दो उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि दो अलग-अलग पीढ़ियों के बीच भी देखने को मिल रहा है।

एक तरफ हैं भाजपा के अनुभवी नेता Vijay Kumar Gupta, तो दूसरी ओर हैं 26 साल की युवा और पहली बार चुनाव लड़ रहीं Kunki Chowdhury, जो इस सीट की सबसे कम उम्र की उम्मीदवार भी हैं।

करीब 1.91 लाख वोटरों वाली इस सीट पर दोनों उम्मीदवार अलग-अलग अंदाज़ में प्रचार कर रहे हैं। कुनकी चौधरी ने जमीनी स्तर पर पान बाज़ार में घर-घर जाकर लोगों से संपर्क किया, जबकि विजय कुमार गुप्ता मलिगांव के दूरदराज इलाकों में पहुंचकर लोगों से मिलते नजर आए, जहां कई लोग उन्हें पहले से अपना विधायक मानते हैं।

वादे, मुद्दे और जनता का मूड

विजय कुमार गुप्ता का फोकस पर्यटन बढ़ाने, सड़क-पानी-लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं, सभी वार्ड में स्टेडियम और शिक्षा के विकास पर है। वहीं कुनकी चौधरी बाढ़ और ड्रेनेज समस्या, स्किल डेवलपमेंट, बेहतर कचरा प्रबंधन, हाई-टेक पार्किंग और महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही हैं।

जनता की राय भी बंटी हुई नजर आ रही है। कुछ मतदाता विकास के नाम पर भाजपा का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई लोग युवा नेतृत्व और बदलाव की उम्मीद में कुनकी चौधरी की ओर झुकाव दिखा रहे हैं।

जहां विजय कुमार गुप्ता अपने 35 साल के अनुभव पर भरोसा जता रहे हैं, वहीं कुनकी चौधरी नई सोच और ऊर्जा के साथ बदलाव का संदेश दे रही हैं।

असम में 9 अप्रैल को होने वाले मतदान के साथ यह साफ हो जाएगा कि जनता अनुभव को चुनती है या युवा नेतृत्व को मौका देती है। सेंट्रल गुवाहाटी सीट इस बार राज्य की सबसे दिलचस्प सीटों में शामिल हो चुकी है।



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राज्य फोकस: पश्चिम बंगाल और असम चुनाव



पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने चुनावी अभियान को तेज कर दिया है और सीधे तौर पर Bharatiya Janata Party को चुनौती दी है। मैनागुड़ी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने मतदाता सूची में गड़बड़ी और केंद्रीय बलों के कथित दुरुपयोग पर गंभीर सवाल उठाए।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा,
“सुरक्षा बलों को निष्पक्ष रहना चाहिए, उन्हें किसी भी पार्टी के एजेंट के रूप में काम नहीं करना चाहिए।”

इसके साथ ही ममता बनर्जी ने NRC और डिटेंशन कैंप का विरोध करते हुए नागरिकों के अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया। उनके इस आक्रामक रुख ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि इस बार मुकाबला बेहद कड़ा होने वाला है और All India Trinamool Congress और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है।

असम

वहीं असम में भी राजनीतिक माहौल काफी गर्म है। Election Commission of India द्वारा कांग्रेस के तीन प्रमुख उम्मीदवारों के नामांकन रद्द किए जाने के बाद विवाद बढ़ गया है। इनमें जलुकबाड़ी सीट से उम्मीदवार विदिशा नियोग का नाम भी शामिल है, जो सीधे मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma को चुनौती दे रही थीं।

विपक्ष के नेता Gaurav Gogoi ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सत्तारूढ़ दल पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा,
“जनता 10 साल की बीजेपी सरकार को हटाने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री की कुर्सी दिल्ली से रिमोट कंट्रोल की तरह चल रही है, जिससे स्थानीय आवाजों की अनदेखी हो रही है।”

इन घटनाओं ने असम के चुनावी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में जनता की बढ़ती नाराजगी और शासन पर अविश्वास साफ नजर आ रहा है, जो आने वाले चुनाव परिणामों पर सीधा असर डाल सकता है।

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Wednesday, 25 March 2026

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव: महंगाई और एलपीजी संकट

 


राजनीतिक हलचल के अलावा, भारत के आम नागरिक इस समय सीधे आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। एलपीजी की कमी के कारण गैस एजेंसियों और स्टेशनों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लोगों में नाराज़गी बढ़ रही है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे सरकार के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। हालांकि, फिलहाल पेट्रोल और डीजल की घरेलू कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए चेतावनी दी कि अगर वैश्विक तनाव जारी रहा, तो भारत को ईंधन और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में वैसी ही बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है जैसा COVID-19 महामारी के दौरान देखा गया था।

इस बीच, रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, जिसमें हालात से निपटने के उपायों पर चर्चा हुई। हालांकि, Trinamool Congress (टीएमसी) जैसी पार्टियों ने सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए इस बैठक का बहिष्कार किया।

विपक्षी दलों ने कानूनी और प्रशासनिक मुद्दों को भी उठाया है। Indian National Congress ने अपने ऐतिहासिक मुख्यालय 24 अकबर रोड को खाली करने के नोटिस को चुनौती दी है और इसे राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि उनके कार्यालय केवल पार्टी संरचना नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ और लोकतांत्रिक विरासत का प्रतीक हैं।


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ईरान-इजराइल तनाव, भारत में राजनीतिक तूफ़ान और असम चुनाव की अपडेट्स: पूरी रिपोर्ट 2026

अंतरराष्ट्रीय संकट: ईरान ने मिसाइल हमले तेज़ किए



दुनिया की निगाहें फिलहाल पश्चिम एशिया पर टिक गई हैं, जहां ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया है। पिछले 24 घंटों में, ईरान ने 220 से अधिक मिसाइलें इजराइली शहरों जैसे कि तेल अवीव, हाइफ़ा और बेनी ब्रक के अलावा क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर दागीं। रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में 500 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जो हाल के वर्षों में सबसे तीव्र मुठभेड़ों में से एक है।

ईरान ने दावा किया है कि उसने अपने नवीनतम पीढ़ी के मिसाइल सिस्टम जैसे फ़तेह-2, सजील, इमाद और खोर्रमशहर-4 का इस्तेमाल किया, जो उसकी सामरिक क्षमताओं में वृद्धि का संकेत है।

कूटनीतिक प्रयास असफल

विवाद को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास अब तक सफल नहीं हुए हैं। अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से 15 शर्तों वाला एक Ceasefire प्रस्ताव रखा, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल विकास को सीमित करना और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ जैसे रणनीतिक जलमार्गों को फिर से खोलना था।

ईरान ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और स्पष्ट किया कि वार्ता केवल उनकी शर्तों पर होगी, जिसमें शामिल हैं:

  1. खाड़ी देशों से सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों की वापसी।
  2. सभी अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना।
  3. पिछले हमलों के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजा।
  4. भविष्य में किसी भी प्रकार की हस्तक्षेप न करने की गारंटी।

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड के लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम ज़ोल्फिकरी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा,
“खुद से बातचीत करना वार्ता नहीं है। हमारी स्थिति शुरू से ही स्पष्ट रही है, और हम अपनी संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं करेंगे।”

वैश्विक प्रभाव

यह संघर्ष पहले ही वैश्विक तेल बाजारों को प्रभावित कर चुका है, जिससे कीमतों में अस्थिरता बढ़ गई है और भारत में ईंधन और एलपीजी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि लंबा संकट दुनिया भर में गंभीर आर्थिक तनाव पैदा कर सकता है।

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